तीन दिवसीय जयपुर दौरे पर आ रहे राजस्थान कांग्रेस के नए प्रभारी के लिए सियासी मसलों को हल करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा 27 दिसंबर को 3 दिवसीय जयपुर दौरे पर आ रहे हैं। प्रभारी 28 दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस के वार रूम में प्रदेश के नेताओं से मुलाक़ात करेंगे। राजस्थान का सियासी हाल जानेंगे समझेंगे और कोशिश करेंगे कि कोई बीच का फ़ॉर्मूला निकाल कर एकजुटता के साथ मिशन 2023 की तैयारी में जुटा जा सके। लेकिन राजस्थान कांग्रेस के नए प्रभारी के लिए चुनौती बिलकुल भी आसान नहीं है। ख़ासतौर पर ऐसे समय में जब राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के ख़त्म होने के ठीक बाद ही पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और विधायक हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ बयान देकर एक बार फिर से मोर्चा खोल दिया है।

गहलोत पायलट कैंप के बीच समन्वय बनाना सबसे बड़ी चुनौती

सुखजिंदर सिंह रंधावा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पायलट गहलोत कैंप के बीच समन्वय बनाने की तो है ही साथ ही आने वाले दिनों में विधानसभा क्षेत्रों में ब्लॉक और जिला अध्यक्षों के नामों में सभी के नामों को एडजेस्ट करना भी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। प्रभारी जो बैठक लेंगे उसका मक़सद बताया गया है कि राहुल गांधी के निर्देशों पर देशभर में हाथ से हाथ जोड़ो अभियान 26 जनवरी से शुरू किया जाना है।

अनुशासनहीनता का डंडा चलाना अब होगा मुश्किल

23 दिसंबर को दिल्ली में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में राजस्थान के सियासी संकट को लेकर कोई फ़ैसला नहीं हो पाया तो माना जा रहा है कि हालात यथावत रहेंगे। ऐसे में तीनों नेताओं के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं होने से पायलट गुट के नेताओं नाराज़गी के स्वर सुनाई दे सकते हैं। प्रभारी को राजस्थान में नेताओं के बीच ये संदेश देना भी बड़ा मुश्किल काम है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता और बयानबाजी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

करने होंगे प्रदेश के दोहरे समझनी होगी कार्यकर्ता की नब्ज़

पार्टी के प्रभारी को भी राजस्थान में कांग्रेस नेताओं के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि पार्टी किस संदेश के आधार पर प्रदेश में संगठन और सत्ता को चलाना चाहती है। अलवर में राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा था कि नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच रस्सी को हटाना होगा। पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता को अहमियत देनी होगी। राजस्थान के नए प्रभारी को इस दिशा में काम करने के लिए प्रदेश में व्यापक दोरे करने होंगे और आने वाले चुनावों के मद्देनज़र सियासी नब्ज़ को पहचानना होगा।

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