8 फरवरी को आएगा राजस्थान बजट, चुनावी वर्ष में अशोक गहलोत की दिखेगी जादूगिरी

राजस्थान का बजट तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वर्तमान कार्यकाल का अंतिम बजट, चुनावी रंगत लिए हुए होगा। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ संभावना जता रहे हैं कि बजट में खर्च का आकार तीन लाख करोड़ के स्तर को पार करेगा, हालांकि सरकार की तैयारियों की बात करें तो योजनाओं का खाका पौने तीन लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकार अपने वित्तीय संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल इस बजट में जन हितैषी योजनाओं पर खर्च करती दिखाई देगी। बजट के केंद्र में युवा और विद्यार्थी रहेंगे, लेकिन प्रोफेशनल, टैक्सपेयर्स, उद्यमी और प्रोफेशनल पर भी गहलोत सरकार पूरी निगाह रखेगी। राजस्थान बजट में विधायकों से मिले इनपुट भी चुनावी धरातल पर जमीन तलाशते हुए दिखाई देंगे।

ऐतिहासिक बजट पेश करने की तैयारी

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार इस बार ऐतिहासिक बजट पेश करने जा रही । राजस्थान के इतिहास का यह सबसे बड़ा बजट होगा। वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के 40 देश ऐसे है, जिनका बजट इस बार के राजस्थान के बजट से कम होता है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछला बजट जो मार्च 2022 में पेश किया था वो भी 2 लाख 15 हजार करोड़ के लगभग का था। हालांकि सरकार ने तय बजट से करीब 23 हजार करोड़ रुपए ज्यादा खर्च किए है। बजट के आधार पर गहलोत सरकार को भी उम्मीद है कि रिपीट के फार्मूले पर वो कारगर साबित होंगे। राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से बना सत्ता परिवर्तन का रूख इस बार बदल पाएगें।

राजस्थान के युवा और किसान का बजट

खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विभिन्न मंचों पर कह चुके है कि हमारी योजनाओं से इस बार जनता बहुत खुश है। इस बार जनता के मन में कोई एंटी-इनकम्बेंसी न होकर प्रो-एफिसिएंसी है। यही कारण है कि हम 9 में से 7 उपचुनाव जीते हैं। BJP सिर्फ एक उपचुनाव जीत सकी और उसमें भी जीत का अंतर मामूली रहा। मुख्य चुनाव में भी जनता कांग्रेस सरकार को ही वापस लाना चाह रही है। राजस्थान का आगामी बजट सत्र 23 जनवरी से आहुत होगा। बजट की फाइलें सचिवालय के गलियारों में सरपट दौड़ रही हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बैठकें लेकर बजट के भावी प्रावधानों पर चर्चा कर चुके हैं। वहीं सचिवालय और वित्त विभाग से जुड़े अधिकारी भी विभिन्न संगठनों के साथ बैठक कर भावी बजट का खाका तैयार कर रहे हैं। यह बजट कई मायनों में खास बनाने की तैयारी है। इसकी सबसे बड़ी वजह बजट का चुनावी वर्ष में आना है। युवा और किसान आगामी बजट में पहली वरीयता लिए हुए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके हैं कि बजट में उन तमाम संभावनाओं को स्थान दिया जाएगा जो राजस्थान के युवा और किसान को आगे बढ़ाएं।

आय के आंकड़े बढ़ा रहे उम्मीदें

प्रदेश की गहलोत सरकार के वर्तमान कार्यकाल का अंतिम बजट होगा। इसके लिए वित्त विभाग की बजट फाइनलाइजेशन कमेटियों की बैठक हो रही है। सीएम अशोक गहलोत इस चुनावी बजट में कई बड़े ऐलान कर सकते है। पिछले बजट की फ्री मोबाइल, लैपटॉप जैसी घोषणाओं को पूरा करने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए इस बजट में भी खर्च होंगे। मोबाइल वितरण पर करीब 5 हजार करोड़ रुपए का शुरुआती खर्च अनुमानित है।

राजस्थान सरकार की आय के आंकड़े उम्मीदें जता रहे है। सरकार के खजाने में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी जीएसटी में हुई है। राजस्व में पिछली बार के 75510.92 करोड़ रुपए की तुलना में 85050.32 करोड़ रुपयों की वृद्धि हुई है। प्रदेश के टैक्स राजस्व में पिछली बार के 49,274.87 करोड़ रुपए की तुलना में 63556.49 करोड़ रुपए हासिल हुए हैं। राजस्थान की विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में इजाफे से जुड़े आकड़े भी बढ़ोतरी दर्शा रहे है।

ऐसे में सरकार की कोशिश है कि चुनावी वर्ष में योजनाओं की घोषणा में कंजूसी नहीं हो। गहलोत सरकार जनघोषणा पत्र के प्रत्येक वाले को सरकारी फाइलों पर उतारने की तैयारी बजट में करने वाली है। साथ ही मतदाताओं के दरवाजे पर चुनाव से पहले दस्तक देने का खाका भी बजट में होगा। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले जयपुर में दो दिन का चिंतन शिविर कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ब्यूरोक्रेसी और कैबिनेट सहयोगियों को दर्शा दिया है कि पूर्व की बजट घोषणाएं और जनघोषणा पत्र के प्रत्येक वादे का हकीकत में ढालना होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम अशोक गहलोत की राजनीतिक जादूगिरी से राजस्थान में पांच साल में सत्ता परिवर्तन का मिथक टूट सकता है।

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